
Delhi Govt EV Policy
लेखक: कृष्णा आर्य | website is https://networkbharat.com
Delhi Govt EV Policy : दिल्ली में ट्रैफिक जाम, बढ़ता प्रदूषण और सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ता दबाव — ये तीनों समस्याएं दशकों से राजधानी के लिए चुनौती बनी हुई हैं। अब दिल्ली सरकार ने इन जटिल समस्याओं से निपटने के लिए एक ऐसा कदम उठाने की तैयारी की है, जो आने वाले वर्षों में शहरी परिवहन की तस्वीर बदल सकता है। सरकार प्राइवेट इलेक्ट्रिक और BS-VI कंप्लायंट कारों को टैक्सी के रूप में चलाने की अनुमति देने के लिए नए रेगुलेटरी रास्तों पर काम कर रही है।
यह फैसला न सिर्फ टैक्सी सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकता है, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण, महिला सुरक्षा और शेयर्ड मोबिलिटी को भी नई दिशा दे सकता है।
दिल्ली सरकार का बड़ा EV फैसला: अब Private Cars बनेंगी Taxi, प्रदूषण पर वार
हाई-लेवल मीटिंग में बना रोडमैप
यह अहम निर्णय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद सामने आया। इस बैठक में प्रमुख कैब एग्रीगेटर्स जैसे Ola, Uber और Rapido के अलावा टाटा मोटर्स, महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसे बड़े ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स भी शामिल हुए।
मीटिंग का मुख्य फोकस था:
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाना
- शेयर्ड टैक्सी और कारपूलिंग को बढ़ावा देना
- दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाना
- प्रदूषण और ट्रैफिक जाम पर स्थायी नियंत्रण
Delhi Govt EV Policy
प्राइवेट कार Taxi कैसे बनेगी?
सरकार के अनुसार, कई राइड-हेलिंग कंपनियां प्राइवेट EV और BS-VI कारों को अपने प्लेटफॉर्म पर टैक्सी के रूप में शामिल करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, मौजूदा मोटर व्हीकल और ट्रांसपोर्ट नियम इसकी अनुमति नहीं देते। इसी वजह से दिल्ली सरकार आने वाले दिनों में जरूरी नियमों में संशोधन करने जा रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि:
- यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि होगी
- ड्राइवर वेरिफिकेशन, बीमा और जवाबदेही के नियम सख्त होंगे
- प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय की जाएगी
एक महीने में शुरू होंगी शेयर्ड Taxi और महिला ड्राइवर कैब
बैठक का सबसे अहम नतीजा यह रहा कि कैब कंपनियों ने एक महीने के भीतर:
- शेयर्ड Taxi सेवाएं
- केवल महिला ड्राइवरों द्वारा संचालित कैब
शुरू करने पर सहमति जताई है।
महिला ड्राइवरों वाली कैब सेवाएं न सिर्फ महिला यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाएंगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी। यह पहल खासतौर पर रात के समय यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए राहतभरी मानी जा रही है।
प्रदूषण पर कैसे पड़ेगा असर?
दिल्ली सरकार इस नीति को प्रदूषण नियंत्रण की मुख्य रणनीति के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री गुप्ता का मानना है कि जब तक:
- निजी वाहनों की संख्या कम नहीं होगी
- लोग शेयर्ड और इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट की ओर नहीं बढ़ेंगे
तब तक हवा की गुणवत्ता में स्थायी सुधार संभव नहीं है।
EV टैक्सियां पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन करती हैं। वहीं, शेयर्ड टैक्सी से एक ही वाहन में कई यात्री सफर करेंगे, जिससे सड़क पर कारों की संख्या घटेगी।
ई-रिक्शा, शटल और चार्जिंग नेटवर्क
सरकार ने केवल टैक्सियों तक ही सोच सीमित नहीं रखी है। बैठक में:
- ई-रिक्शा को एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जोड़ने
- रिंग रोड और एयरपोर्ट तक शटल सेवाओं के पायलट प्रोजेक्ट
- मजबूत पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क
पर भी चर्चा हुई।
ऑटोमोबाइल कंपनियों ने साफ कहा कि बिना बड़े और भरोसेमंद चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के EV नीति सफल नहीं हो सकती। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने चार्जिंग स्टेशनों के लिए सरकारी जमीन देने की पेशकश की, साथ ही सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर जोर दिया।
विशेषज्ञों की राय: मौका बड़ा, जिम्मेदारी भी
परिवहन विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही सावधानी बरतने की सलाह भी दी है।
इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन के अमित भट्ट के अनुसार, दुनिया के कई देशों में प्राइवेट वाहन एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर चलते हैं। चूंकि टैक्सियां पर्सनल कारों की तुलना में ज्यादा चलती हैं, इसलिए उत्सर्जन में कमी का फायदा भी बड़ा होता है। लेकिन इसके लिए सुरक्षा, बीमा और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर स्पष्ट नियम जरूरी हैं।
Rapido का कारपूलिंग मॉडल
रैपिडो ने दिल्ली में अपनी पीयर-टू-पीयर कारपूलिंग सर्विस ‘होपर’ का प्रस्ताव रखा है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल कम लागत में ज्यादा लोगों को एक साथ यात्रा की सुविधा देता है और ट्रैफिक व प्रदूषण दोनों को कम कर सकता है।
क्या बदलेगी दिल्ली की ट्रांसपोर्ट तस्वीर?
अगर यह नीति सही ढंग से लागू होती है, तो:
- Taxi किराए किफायती हो सकते हैं
- महिलाओं के लिए यात्रा ज्यादा सुरक्षित बनेगी
- EV अपनाने की रफ्तार तेज होगी
- दिल्ली की हवा पर सकारात्मक असर दिखेगा
यह फैसला न सिर्फ दिल्ली बल्कि अन्य बड़े शहरों के लिए भी मॉडल पॉलिसी बन सकता है।
निष्कर्ष
दिल्ली सरकार का यह EV और शेयर्डTaxi फैसला सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट रिफॉर्म नहीं, बल्कि पर्यावरण, सुरक्षा और शहरी जीवनशैली से जुड़ा बड़ा बदलाव है। अब सबकी नजर इस पर है कि नियमों में बदलाव कितनी तेजी से होते हैं और कंपनियां अपने वादों को ज़मीन पर कितनी प्रभावी तरीके से उतार पाती हैं।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो आने वाले समय में दिल्ली की सड़कों पर कम धुआं, कम जाम और ज्यादा स्मार्ट मोबिलिटी देखने को मिल सकती है।
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दिल्ली सरकार का यह EV फैसला ट्रैफिक, प्रदूषण और महिला सुरक्षा—तीनों पर बड़ा असर डाल सकता है। पूरी जानकारी और असर समझने के लिए हमारे साथ बने रहें।


