Kharmas 2025: आरंभ तिथि, धार्मिक महत्व, नियम-व्रत और सूर्य देव से जुड़ी पौराणिक कथा

Surya Dev worship during Kharmas 2025 spiritual month in Hindu astrology

Kharmas

लेखक – कृष्णा आर्य | नेटवर्क भारत (https://networkbharat.com)

Kharmas : हिंदू पंचांग में खरमास को वर्ष का अत्यंत पुण्यकाल माना गया है। यह वह महीना होता है जब बाहरी शुभ कार्य ठहर जाते हैं और आंतरिक साधना का समय शुरू होता है। खरमास 2025 की शुरुआत 15 दिसंबर रात 10:19 बजे सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ होगी और इसका समापन 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के दिन होगा।

जहाँ इस अवधि में विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, वहीं व्रत, दान, पूजा-पाठ और तपस्या के लिए यह काल अत्यंत फलदायी माना जाता है।


खरमास क्या है और क्यों मनाया जाता है?

ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य गुरु की राशियों:

  • धनु (Sagittarius)
  • मीन (Pisces)

में प्रवेश करता है, तब खरमास का समय होता है।

सूर्य को आत्मबल एवं ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है और गुरु ग्रह धर्म व ज्ञान का कारक है। इन दोनों के संयोग में सूर्य की तेजस्विता अस्थायी रूप से कमजोर पड़ जाती है। इसी कारण ज्योतिष शास्त्र में इस काल को मांगलिक व बड़े संस्कारों के लिए अशुभ कहा गया है।

इसी वजह से इस दौरान:

❌ विवाह
❌ गृह प्रवेश
❌ मुंडन
❌ नामकरण
❌ नया व्यापार आरंभ

जैसे कार्य स्थगित रखे जाते हैं।


खरमास 2025 – तिथि

🗓️ प्रारंभ: 15 दिसंबर 2025, रात 10:19 बजे
🗓️ समापन: 14 जनवरी 2026 – मकर संक्रांति

16 दिसंबर सूर्योदय के साथ पूरा महीना खरमास माना जाएगा।


खरमास वर्ष में दो बार क्यों आता है?

खरमास साल में दो बार पड़ता है क्योंकि सूर्य दो बार गुरु की राशियों में प्रवेश करता है:

समयसूर्य की राशि
शीतकालीन खरमासधनु (15 दिसंबर – 14 जनवरी)
वसंतकालीन खरमासमीन (15 मार्च – 15 अप्रैल)

दोनों ही महीनों में नियम समान रहते हैं —
दान, जप, पाठ और पूजा सर्वोत्तम फल प्रदान करते हैं।


खरमास और मौसम का प्रभाव

खरमास हेमंत ऋतु के दौरान पड़ता है। यह समय प्राकृतिक बदलावों का संकेत देता है:

🌫️ कोहरा
❄️ ठंड में वृद्धि
🌧️ हल्की वर्षा
🌬️ ठंडी हवाएँ
🏔️ पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी

शास्त्रों के अनुसार सूर्य की गति धीमी होने से ऋतु परिवर्तन होता है, जिससे वातावरण में भी ठहराव और शीतलता आती है।


खरमास में किए जाने वाले श्रेष्ठ कार्य

📖 1. धार्मिक ग्रंथों का पाठ

इन ग्रंथों के अध्ययन से विशेष पुण्य प्राप्त होता है:

  • श्रीमद्भगवद्गीता
  • भागवत पुराण
  • शिव पुराण
  • रामचरितमानस

एक भी ग्रंथ का पूरा पाठ आत्म-शुद्धि के लिए पर्याप्त माना गया है।


🌅 2. सूर्य अर्घ्य

सुबह स्नान कर तांबे के लोटे में जल, फूल, अक्षत और कुमकुम मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।

मंत्र:
🕉️ ॐ सूर्याय नमः

लाभ:
✅ स्वास्थ्य सुधार
✅ मान-सम्मान वृद्धि
✅ ग्रह दोष शांति


🤲 3. दान और सेवा

खरमास में किया गया दान अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है:

🧦 कम्बल, गर्म वस्त्र
🥗 अन्न दान
🪔 घी के दीपक
🌸 पूजा सामग्री
👟 जूते-चप्पल

दान सूर्योदय से पहले करना विशेष फलदायी होता है।


🛕 4. तीर्थ स्नान व मंदिर दर्शन

मान्यता है कि इस समय गंगा स्नान तथा मंदिर दर्शन:

✅ पापों का क्षय करते हैं
✅ जीवन में शांति लाते हैं
✅ कष्टों से मुक्ति देते हैं


खरमास में विवाह क्यों नहीं होते?

📉 सूर्य कमजोर होता है
📉 गुरु प्रभाव मंद पड़ता है
⚖️ ग्रह संतुलन अस्थिर होता है

मांगलिक कार्यों के लिए सूर्य और गुरु दोनों का शक्तिशाली होना जरूरी माना जाता है। इसलिए विवाह या नए प्रारंभ खरमास के बाद ही शुभ माने जाते हैं।


खरमास से जुड़ी पौराणिक कथा

पुराणों में वर्णन मिलता है कि सूर्य देव का रथ सात दिव्य घोड़े खींचते हैं

एक बार लंबे सफर में घोड़े थक गए। सूर्य देव ने उन्हें एक सरोवर के पास विश्राम दिया। पर रथ रुकने से ब्रह्मांड की गति ठहर जाती।

तभी दो गधे (खर) वहां खड़े थे। सूर्य देव ने अस्थायी रूप से रथ उनसे खिंचवाया।

गधों की धीमी गति से सूर्य की चाल भी मंद हो गई — यही समय कहलाया:

👉 खरमास (खर + मास)

घोड़े स्वस्थ होने के बाद पूर्ण वेग लौट आया, और खरमास समाप्त हुआ।


खरमास का समापन कब होता है?

🌅 14 जनवरी 2026 – मकर संक्रांति

इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, और तब:

✅ विवाह पुनः प्रारंभ
✅ गृह प्रवेश शुभ
✅ नए व्यापार आरंभ
✅ मांगलिक कार्य संभव


खरमास का आध्यात्मिक संदेश

खरमास हमें सिखाता है कि—

🌱 सुख त्याग से मिलता है
🧘 शांति साधना से आती है
🤲 समृद्धि सेवा से बढ़ती है

यह महीना आंतरिक आत्म-विकास का स्वर्णिम अवसर है।


निष्कर्ष

खरमास 2025 सिर्फ परम्पराओं का नहीं बल्कि आत्म-उद्धार का समय है। दान, भक्ति और संयम से बिताया गया यह महीना जीवन को नई आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है।



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🔔 डिस्क्लेमर:
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अवधारणाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत अनुभव भिन्न हो सकते हैं।

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