Sakat Chauth 2026: तिथि, चंद्र उदय समय, पूजा विधि, व्रत नियम और संतान के लिए चमत्कारी लाभ

Sakat Chauth 2026 puja performed by women with Lord Ganesha idol and moon worship for children’s long life

✍️ लेखक: Krishna Arya
🌐 वेबसाइट: https://networkbharat.com

Sakat Chauth 2026 date and puja vidhi : हिंदू धर्म में व्रत और त्योहार केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, भावनाओं और परिवार की सुरक्षा से जुड़े होते हैं। सकट चौथ ऐसा ही एक अत्यंत शक्तिशाली और भावनात्मक व्रत है, जिसे विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और बाधा-मुक्त जीवन के लिए करती हैं।

साल 2026 में Sakat Chauthमंगलवार, 6 जनवरी को मनाई जाएगी। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है और इसे तिलकुटा चौथ, वक्रतुंडी चतुर्थी और माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है।


📅 Sakat Chauth 2026 की तिथि और शुभ समय

हिंदू पंचांग के अनुसार:

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 6 जनवरी 2026, सुबह 8:01 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 7 जनवरी 2026, सुबह 6:53 बजे
  • चंद्र उदय समय: 6 जनवरी की रात लगभग 8:54 बजे

👉 इस व्रत में चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है, इसलिए चंद्र उदय का समय विशेष महत्व रखता है।


🙏 Sakat Chauth पर किस भगवान की पूजा होती है?

सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है।
उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी जो जीवन की सभी बाधाओं को दूर करते हैं। मान्यता है कि इस दिन रात्रि में गणेश जी की पूजा करने से संतान पर आने वाले हर संकट से रक्षा होती है।


🌙 Sakat Chauth को सबसे शक्तिशाली चतुर्थी क्यों माना जाता है?

पूरे वर्ष में आने वाली सभी चतुर्थियों में सकट चौथ को सबसे प्रभावशाली माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • यह व्रत संतान रक्षा कवच का कार्य करता है
  • परिवार में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है
  • घर में सुख, शांति और स्थिरता आती है
  • संतान के जीवन से रोग, भय और बाधाएं दूर होती हैं

यही कारण है कि यह व्रत माताओं के लिए भावनात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।


🪔 Sakat Chauth 2026 की संपूर्ण पूजा विधि (Puja Vidhi)

सकट चौथ की पूजा प्रायः रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद की जाती है।

पूजा की विधि इस प्रकार है:

  1. दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत रखें
  2. शाम को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  3. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  4. गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  5. दीपक जलाकर मंत्रों के साथ पूजा करें
  6. चंद्रमा को अर्घ्य दें
  7. कथा सुनें या पढ़ें
  8. अंत में प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें

🧺 Sakat Chauth पूजा सामग्री की पूरी सूची

Sakat Chauth की पूजा इन वस्तुओं के बिना अधूरी मानी जाती है:

  • गंगाजल
  • पान के पत्ते और सुपारी
  • जनेऊ
  • फूल और माला
  • लौंग
  • पूजा आसन व चौकी
  • तिल के लड्डू
  • फल
  • कलश
  • दीपक और घी
  • दूर्वा घास
  • मोदक
  • गणेश जी की मूर्ति या चित्र
  • दूध
  • व्रत कथा पुस्तक
  • कुमकुम और हल्दी

🤲 Sakat Chauth पर दान का महत्व

इस शुभ दिन दान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है
विशेष रूप से इन वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है:

  • घी
  • गुड़
  • तिल
  • अनाज
  • तांबे के बर्तन
  • गर्म कपड़े

👉 मान्यता है कि दान करने से जीवन में आर्थिक समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है।


🌕 चंद्र पूजा और व्रत पारण का नियम

  • चंद्रमा को दूध, जल और अक्षत से अर्घ्य दें
  • संतान का नाम लेकर प्रार्थना करें
  • गणेश जी से परिवार की रक्षा की कामना करें
  • इसके बाद ही व्रत तोड़ें

🌼 Sakat Chauth का आध्यात्मिक और भावनात्मक महत्व

सकट चौथ केवल एक धार्मिक व्रत नहीं है, बल्कि यह मां और संतान के बीच अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।
यह व्रत यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और निस्वार्थ प्रार्थना से हर संकट टाला जा सकता है।


📌 निष्कर्ष

Sakat Chauth 2026 माताओं के लिए एक ऐसा अवसर है, जब वे पूरे मन से भगवान गणेश से अपनी संतान की रक्षा की प्रार्थना करती हैं।
यदि श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ यह व्रत किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव निश्चित रूप से देखने को मिलते हैं।


Sakat Chauth 2026 किस दिन है?

सकट चौथ मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है।


❓ सकट चौथ 2026 में चांद कब निकलेगा?

सकट चौथ के दिन चंद्रमा रात लगभग 8:54 बजे उदित होगा। व्रत चंद्र दर्शन और पूजा के बाद ही खोला जाता है।


❓Sakat Chauth का व्रत कौन करता है?

यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए करती हैं, हालांकि परिवार के अन्य सदस्य भी कर सकते हैं।


❓ Sakat Chauth पर किस देवता की पूजा होती है?

सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है, जिन्हें विघ्नहर्ता और संतान के रक्षक के रूप में पूजा जाता है।


❓ क्या सकट चौथ सबसे शक्तिशाली चतुर्थी मानी जाती है?

जी हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सकट चौथ को वर्ष की सबसे प्रभावशाली चतुर्थी माना जाता है, क्योंकि यह संतान की रक्षा और परिवार की सुख-शांति से जुड़ी होती है।


❓ Sakat Chauth को तिलकुटा चौथ क्यों कहते हैं?

इस दिन तिल (तिलकुट) से बने लड्डू और मिठाइयों का विशेष भोग लगाया जाता है, इसलिए इसे तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है।


❓ Sakat Chauth पर क्या खाना खाया जाता है?

व्रत के दौरान फलाहार किया जाता है और व्रत खोलते समय तिल के लड्डू, फल, दूध और प्रसाद ग्रहण किया जाता है।


❓ सकट चौथ पर दान क्यों किया जाता है?

मान्यता है कि इस दिन तिल, गुड़, घी, अनाज और वस्त्र का दान करने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है और जीवन में समृद्धि आती है।


❓ क्या सकट चौथ पर निर्जला व्रत जरूरी है?

निर्जला व्रत अनिवार्य नहीं है। श्रद्धालु अपनी शक्ति और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रख सकते हैं।


❓ सकट चौथ की पूजा दिन में होती है या रात में?

सकट चौथ की मुख्य पूजा रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद की जाती है, यही इस व्रत की सबसे महत्वपूर्ण विधि मानी जाती है।

⚠️ Disclaimer

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारियों पर आधारित है। Networkbharat.com किसी भी अंधविश्वास का समर्थन नहीं करता।

ॐ श्री गणेशाय नमः

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