FCRA Amendment Bill 2026 Latest Update: JPC को भेजा गया बिल, जानिए बड़े बदलाव और अब आगे क्या होगा

FCRA Amendment Bill 2026 Latest Update

FCRA Amendment Bill 2026 Latest Update

13 अगस्त 2026

FCRA Amendment Bill 2026 Latest Update: विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखने वाला FCRA Amendment Bill 2026 अब संसद में एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। लोकसभा ने इस विधेयक को विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (Joint Parliamentary Committee यानी JPC) के पास भेज दिया है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब विधेयक को लेकर संसद में विपक्ष की ओर से जोरदार विरोध और आपत्तियां देखने को मिलीं। विपक्षी दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी योगदान की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

यह विधेयक NGO, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य ऐसे संगठनों के लिए महत्वपूर्ण है जो FCRA के तहत विदेशी योगदान प्राप्त करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FCRA Amendment Bill 2026 अभी कानून नहीं बना है। JPC में इसकी समीक्षा के बाद ही आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी होगी।

FCRA Amendment Bill 2026 का Latest Update क्या है?

FCRA Amendment Bill 2026 को लोकसभा में 25 मार्च 2026 को पेश किया गया था। अब इसे 31 सदस्यीय Joint Parliamentary Committee को भेजा गया है।

JPC में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। समिति विधेयक के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी।

JPC में भेजे जाने का मतलब यह है कि विधेयक पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। समिति इसके प्रावधानों, संभावित प्रभावों और उठाई गई आपत्तियों का अध्ययन करेगी।

रिपोर्टों के अनुसार, समिति अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में पेश कर सकती है।

FCRA क्या है?

FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाला कानून है।

वर्तमान में FCRA Act, 2010 के तहत पात्र संस्थाओं और संगठनों को विदेशी योगदान प्राप्त करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।

FCRA के दायरे में आने वाले संगठनों में मुख्य रूप से शामिल हो सकते हैं:

  • NGO
  • सामाजिक और धर्मार्थ संस्थाएं
  • शैक्षणिक संस्थान
  • धार्मिक संगठन
  • स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले संगठन
  • सांस्कृतिक संस्थाएं
  • सामाजिक कल्याण से जुड़े संगठन

इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी स्रोतों से प्राप्त धन का इस्तेमाल कानून के अनुसार और घोषित उद्देश्यों के लिए किया जाए।

FCRA Amendment Bill 2026 क्यों महत्वपूर्ण है?

2026 के प्रस्तावित संशोधन में सबसे ज्यादा चर्चा विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों से जुड़े प्रावधानों की हो रही है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी संगठन का FCRA प्रमाणपत्र रद्द हो जाता है, संगठन खुद प्रमाणपत्र सरेंडर कर देता है या प्रमाणपत्र किसी अन्य कारण से समाप्त हो जाता है, तो कुछ परिस्थितियों में विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियों को Designated Authority के पास अस्थायी रूप से निहित किया जा सकता है।

यदि निर्धारित अवधि में संगठन को नया प्रमाणपत्र, नवीनीकरण या बहाली मिल जाती है, तो प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार संबंधित संपत्ति और अप्रयुक्त विदेशी योगदान की वापसी की व्यवस्था हो सकती है।

लेकिन यदि निर्धारित अवधि में संगठन अपनी FCRA स्थिति दोबारा हासिल नहीं कर पाता है, तो कुछ परिस्थितियों में संपत्ति स्थायी रूप से Designated Authority में निहित हो सकती है।

यही प्रावधान इस पूरे विधेयक के सबसे महत्वपूर्ण और विवादित हिस्सों में से एक माना जा रहा है।

Designated Authority क्या करेगी?

FCRA Amendment Bill 2026 में प्रस्तावित Designated Authority की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यह प्राधिकरण कुछ मामलों में:

  • निहित संपत्तियों की सुरक्षा कर सकता है।
  • संपत्तियों का रिकॉर्ड और इन्वेंट्री बनाए रख सकता है।
  • संबंधित संपत्तियों का प्रबंधन कर सकता है।
  • निर्धारित परिस्थितियों में संपत्ति वापस कर सकता है।
  • स्थायी रूप से निहित संपत्ति को सरकारी विभाग या प्राधिकरण को हस्तांतरित कर सकता है।
  • कुछ संपत्तियों की बिक्री या अन्य तरीके से निपटान कर सकता है।
  • बिक्री से प्राप्त राशि और अप्रयुक्त विदेशी योगदान को Consolidated Fund of India में जमा कर सकता है।

विधेयक में पूजा स्थलों से संबंधित विशेष प्रावधान भी प्रस्तावित किए गए हैं। ऐसे मामलों में धार्मिक स्थल के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने की बात कही गई है।

FCRA Registration खत्म होने पर NGO की संपत्ति का क्या होगा?

यह सवाल इस समय सबसे अधिक चर्चा में है।

प्रस्तावित कानून के तहत किसी संगठन का FCRA प्रमाणपत्र रद्द होने, सरेंडर होने या समाप्त होने की स्थिति में विदेशी योगदान और उससे बनाई गई कुछ संपत्तियों को लेकर एक विशेष प्रक्रिया लागू हो सकती है।

पहला चरण: अस्थायी निहितीकरण

निर्धारित परिस्थितियों में संपत्ति को पहले provisional vesting यानी अस्थायी रूप से निहित किया जा सकता है।

इस दौरान Designated Authority के पास संपत्ति की निगरानी और सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी हो सकती है।

दूसरा चरण: स्थायी निहितीकरण

यदि निर्धारित अवधि में संगठन नया FCRA प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं करता या उसका प्रमाणपत्र बहाल नहीं होता, तो प्रस्तावित प्रावधानों के तहत संबंधित विदेशी योगदान और संपत्ति स्थायी रूप से Designated Authority में निहित हो सकती है।

इसके बाद संपत्ति के संबंध में वही प्रक्रिया लागू होगी जो कानून में निर्धारित की जाएगी।

“Key Functionaries” कौन होंगे?

FCRA Amendment Bill 2026 में Key Functionaries की अवधारणा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

इसमें किसी संगठन के निदेशक, पार्टनर, ट्रस्टी, पदाधिकारी, गवर्निंग बॉडी या प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तियों को शामिल किया जा सकता है।

प्रस्तावित विधेयक में इन प्रमुख पदाधिकारियों की कुछ जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई संगठन समाप्त हो जाता है या काम करना बंद कर देता है, तो उसके अंतिम Key Functionaries को निर्धारित तरीके से केंद्र सरकार को सूचना देने की जिम्मेदारी हो सकती है।

इसका मतलब है कि भविष्य में FCRA से जुड़े संगठनों के लिए सिर्फ संस्थागत अनुपालन ही नहीं, बल्कि प्रमुख पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां भी अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

FCRA Certificate Renewal पर क्यों बढ़ेगा ध्यान?

FCRA Registration स्थायी नहीं होता। संगठनों को निर्धारित समय पर इसका नवीनीकरण कराना पड़ता है।

प्रस्तावित संशोधन में ऐसी स्थितियों को भी स्पष्ट रूप से संबोधित किया गया है, जब किसी संगठन का FCRA प्रमाणपत्र समाप्त हो जाता है या उसका नवीनीकरण नहीं होता।

विधेयक में cessation of FCRA certificate यानी FCRA प्रमाणपत्र के समाप्त होने की स्थिति से संबंधित प्रावधान प्रस्तावित हैं।

इसी स्थिति को आगे संपत्ति के निहितीकरण से जोड़ने का प्रस्ताव है।

इसलिए यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो FCRA से जुड़े संगठनों के लिए renewal deadline और compliance records को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो सकती है।

Prior Permission से मिले विदेशी फंड पर क्या बदलाव होगा?

FCRA के तहत कुछ संगठन नियमित FCRA Registration के बजाय Prior Permission के माध्यम से विदेशी योगदान प्राप्त करते हैं।

प्रस्तावित विधेयक में ऐसे विदेशी योगदान के इस्तेमाल को लेकर भी समय-सीमा से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं।

इसका मतलब है कि Prior Permission के तहत मिलने वाले विदेशी योगदान को निर्धारित समय और निर्धारित उद्देश्य के अनुसार इस्तेमाल करना और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

FCRA Bill 2026 में सजा को लेकर क्या बदलाव प्रस्तावित है?

विधेयक में FCRA के तहत दंड व्यवस्था में भी बदलाव का प्रस्ताव है।

PRS India के विधायी विश्लेषण के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन में FCRA के उल्लंघन के लिए अधिकतम कारावास की अवधि को पांच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव है।

हालांकि, अपराध की प्रकृति और संबंधित प्रावधान के आधार पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई का प्रावधान बना रह सकता है।

यह विधेयक का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिस पर सार्वजनिक चर्चा में अपेक्षाकृत कम ध्यान गया है।

विपक्ष FCRA Amendment Bill 2026 का विरोध क्यों कर रहा है?

विधेयक को लेकर संसद में विपक्ष की ओर से कई गंभीर आपत्तियां उठाई गई हैं।

विपक्षी दलों का मुख्य सवाल Designated Authority की प्रस्तावित शक्तियों और FCRA Registration समाप्त होने के बाद विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर नियंत्रण से जुड़ा है।

कुछ विपक्षी नेताओं और संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रस्तावित प्रावधानों का असर अल्पसंख्यक और धार्मिक संस्थानों पर अधिक पड़ सकता है।

हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि विधेयक किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं है और इसका उद्देश्य विदेशी योगदान की व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाना है।

अब JPC के सामने इन सभी दावों और आपत्तियों की विस्तृत जांच का अवसर होगा।

FCRA के तहत कितने संगठन आते हैं?

FCRA व्यवस्था के पैमाने को समझने के लिए उपलब्ध आंकड़े महत्वपूर्ण हैं।

PRS India के अनुसार, गृह मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों ने ₹55,741 करोड़ का विदेशी योगदान प्राप्त किया था।

इसके अलावा, 15 जुलाई 2026 तक FCRA पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार:

  • 14,449 सक्रिय FCRA प्रमाणपत्र
  • 22,498 रद्द किए गए प्रमाणपत्र
  • 15,212 समाप्त माने गए प्रमाणपत्र

दर्ज थे।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि FCRA में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव NGO और विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

31 सदस्यीय JPC अब क्या करेगी?

अब JPC विधेयक के अलग-अलग पहलुओं की जांच करेगी।

समिति मुख्य रूप से इन मुद्दों पर विचार कर सकती है:

  1. Designated Authority की शक्तियां।
  2. विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों का प्रबंधन।
  3. संपत्ति के अस्थायी और स्थायी निहितीकरण के प्रावधान।
  4. FCRA Registration के नवीनीकरण और समाप्ति की व्यवस्था।
  5. Key Functionaries की जिम्मेदारियां।
  6. धार्मिक और धर्मार्थ संपत्तियों से संबंधित प्रावधान।
  7. दंड और जुर्माने की व्यवस्था।
  8. जांच और प्रवर्तन से संबंधित प्रावधान।
  9. विपक्ष और अन्य हितधारकों की आपत्तियां।
  10. विधेयक में संभावित संशोधन।

JPC की रिपोर्ट के बाद विधेयक की आगे की दिशा और अधिक स्पष्ट होगी।

FCRA Amendment Bill 2026 के बाद अब क्या होगा?

JPC द्वारा विधेयक की जांच और रिपोर्ट तैयार करने के बाद मामला फिर संसद की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा।

समिति अपनी सिफारिशों के आधार पर विधेयक में बदलाव सुझा सकती है। सरकार इन सिफारिशों पर विचार कर सकती है और जरूरत पड़ने पर विधेयक के प्रावधानों में संशोधन किया जा सकता है।

इसके बाद विधेयक को संसदीय प्रक्रिया के अगले चरणों से गुजरना होगा।

इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि प्रस्तावित FCRA प्रावधान लागू हो चुके हैं।

वर्तमान FCRA कानून और प्रस्तावित FCRA Amendment Bill 2026 को अलग-अलग समझना जरूरी है।

NGOs और FCRA संगठनों को अभी क्या करना चाहिए?

जब तक संशोधित कानून लागू नहीं होता, FCRA से जुड़े संगठनों को मौजूदा कानून और नियमों के अनुसार ही काम करना चाहिए।

हालांकि, उन्हें प्रस्तावित बदलावों पर नजर रखना भी जरूरी है।

संगठनों को खासतौर पर:

  • FCRA Registration की वैधता जांचनी चाहिए।
  • Renewal की तारीख पर नजर रखनी चाहिए।
  • विदेशी योगदान का सही रिकॉर्ड रखना चाहिए।
  • बैंक खातों और लेखांकन रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना चाहिए।
  • विदेशी फंड का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए करना चाहिए।
  • आवश्यक Returns और Compliance Documents समय पर जमा करने चाहिए।
  • संगठन के पदाधिकारियों और ट्रस्टियों के रिकॉर्ड अपडेट रखने चाहिए।
  • विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों का उचित दस्तावेजीकरण करना चाहिए।
  • FCRA से संबंधित नए सरकारी निर्देशों पर नजर रखनी चाहिए।

इन उपायों से संगठनों को मौजूदा नियमों के साथ-साथ संभावित भविष्य के बदलावों के लिए भी तैयार रहने में मदद मिलेगी।

FCRA Bill 2026: क्या तय है और क्या अभी प्रस्तावित है?

FCRA Bill 2026 को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि पाठकों को प्रस्तावित कानून और मौजूदा कानून के बीच अंतर समझना चाहिए।

तय तथ्य: FCRA Amendment Bill 2026 को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया और अब इसे 31 सदस्यीय JPC को भेजा गया है।

प्रस्तावित बदलाव: Designated Authority, विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों के निहितीकरण, Key Functionaries की जिम्मेदारियों और अन्य संशोधनों से संबंधित प्रावधान अभी विधेयक का हिस्सा हैं।

अगला चरण: JPC विधेयक की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट के बाद संसदीय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इसलिए सोशल मीडिया या इंटरनेट पर चल रही ऐसी खबरों से सावधान रहना जरूरी है जिनमें कहा जा रहा हो कि विधेयक के सभी प्रावधान तत्काल लागू हो गए हैं।

FCRA Amendment Bill 2026: एक नजर में महत्वपूर्ण बातें

मुद्दाताजा स्थिति
विधेयकForeign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026
मौजूदा कानूनFCRA Act, 2010
लोकसभा में पेश25 मार्च 2026
ताजा अपडेटJPC को भेजा गया
JPC सदस्य31
लोकसभा सदस्य21
राज्यसभा सदस्य10
प्रमुख प्रस्तावDesignated Authority की व्यवस्था
सबसे चर्चित मुद्दाविदेशी फंड से बनी संपत्तियों का निहितीकरण
अन्य प्रमुख बदलावKey Functionaries की जिम्मेदारियां
सजा से जुड़ा प्रस्तावअधिकतम कारावास 5 वर्ष से 1 वर्ष करने का प्रस्ताव
मौजूदा स्थितिसंसदीय जांच के अधीन

निष्कर्ष: FCRA Bill 2026 पर अभी सबकी नजर JPC पर

FCRA Amendment Bill 2026 Latest Update के मुताबिक, विधेयक अब 31 सदस्यीय Joint Parliamentary Committee के पास पहुंच चुका है। यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है क्योंकि JPC विधेयक के विवादित और संवेदनशील प्रावधानों की विस्तृत जांच करेगी।

विशेष रूप से विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों, FCRA Registration समाप्त होने के बाद संपत्ति के संभावित निहितीकरण, Designated Authority की शक्तियों और Key Functionaries की जिम्मेदारियों पर नजर रहेगी।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव विदेशी योगदान की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से हैं, जबकि विपक्ष ने इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।

अब JPC की रिपोर्ट इस पूरे मामले में अगला बड़ा पड़ाव होगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात: FCRA Amendment Bill 2026 को JPC के पास भेजा जाना यह नहीं दर्शाता कि विधेयक कानून बन चुका है। इसके प्रावधान अभी संसदीय जांच के अधीन हैं और आगे की प्रक्रिया के बाद ही इसकी अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य सूचना और समाचार उद्देश्यों के लिए है। FCRA Amendment Bill 2026 एक प्रस्तावित विधेयक है और संसदीय जांच की प्रक्रिया में है। कानूनी अनुपालन के लिए पाठकों और संगठनों को नवीनतम आधिकारिक सरकारी अधिसूचनाओं और लागू कानून का संदर्भ लेना चाहिए।

लेखक: कृष्ण आर्य
वेबसाइट: Network Bharat

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