ECI to Supreme Court: विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट से बाहर रखना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है, SIR कोई NRC नहीं

ECI constitutional duty electoral rolls foreigners

ECI constitutional duty electoral rolls foreigners

लेखक: Krishna Arya
वेबसाइट: Network Bharat (https://networkbharat.com)

ECI constitutional duty electoral rolls foreigners : भारत में लोकतंत्र की नींव निष्पक्ष और शुद्ध चुनाव प्रणाली पर टिकी है। इसी संदर्भ में Election Commission of India (ECI) ने Supreme Court of India के समक्ष स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मतदाता सूची में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम शामिल न हो, यह सुनिश्चित करना उसका संवैधानिक दायित्व है। आयोग ने यह भी दोहराया कि Special Intensive Revision (SIR) को NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स) से जोड़ना पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

संवैधानिक जिम्मेदारी क्या कहती है?

ECI ने अदालत को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों का संचालन और मतदाता सूचियों की शुद्धता बनाए रखना उसकी मूल जिम्मेदारी है। इसका अर्थ है कि केवल भारतीय नागरिकों को ही वोट देने का अधिकार मिले—न कि किसी भी तरह से अपात्र या विदेशी नागरिकों को।

SIR बनाम NRC: भ्रम क्यों?

हाल के दिनों में SIR को NRC की तरह पेश किए जाने पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया। ECI के अनुसार:

  • SIR एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट, शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है।
  • NRC नागरिकता निर्धारण की प्रक्रिया है, जिसका दायरा और उद्देश्य अलग है।
  • SIR का मकसद चुनावी पारदर्शिता है, न कि नागरिकता पर निर्णय।

सुप्रीम कोर्ट में ECI का तर्क

सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि यदि मतदाता सूची में विदेशी नागरिक शामिल हो जाते हैं, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है। इसलिए:

  • नाम जोड़ने/हटाने की प्रक्रिया कानून के तहत और निष्पक्ष जांच के बाद होती है।
  • किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आपत्ति और अपील के अवसर उपलब्ध रहते हैं।

लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता से न केवल चुनावों पर जनता का भरोसा बढ़ता है, बल्कि लोकतंत्र भी मजबूत होता है। ECI का यह रुख बताता है कि संस्था कानून, संविधान और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर अडिग है।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई जारी है। अंतिम निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि SIR जैसी प्रक्रियाओं को लेकर भविष्य में किस तरह की दिशानिर्देश तय किए जाएंगे। हालांकि, ECI का संदेश साफ है—चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है


निष्कर्ष:
ECI का यह बयान न केवल संवैधानिक मूल्यों की पुष्टि करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र के लिए कितनी अहम है। SIR को NRC बताकर फैलाया गया भ्रम अब धीरे-धीरे साफ हो रहा है, और यह भरोसा मजबूत हो रहा है कि चुनावी व्यवस्था निष्पक्ष हाथों में है।

❓ SIR क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

उत्तर: SIR (Special Intensive Revision) मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया है, ताकि केवल योग्य भारतीय नागरिकों के नाम ही वोटर लिस्ट में रहें।

❓ क्या SIR को NRC माना जा सकता है?

उत्तर: नहीं। Election Commission of India ने साफ कहा है कि SIR का NRC से कोई संबंध नहीं है। यह केवल चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा प्रशासनिक कदम है।

❓ ECI ने सुप्रीम कोर्ट में क्या तर्क दिया?

उत्तर: ECI ने Supreme Court of India से कहा कि विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट से बाहर रखना उसका संवैधानिक कर्तव्य है।

❓ क्या मतदाता सूची से नाम हटाने से अधिकारों का हनन होता है?

उत्तर: नहीं। ECI के अनुसार, नाम हटाने की प्रक्रिया कानून के तहत होती है और व्यक्ति को आपत्ति व अपील का पूरा अवसर दिया जाता है।

❓ विदेशी नागरिक अगर वोटर लिस्ट में हों तो क्या असर पड़ता है?

उत्तर: इससे चुनाव की निष्पक्षता और लोकतंत्र की विश्वसनीयता कमजोर होती है, इसलिए ECI इसे गंभीर मुद्दा मानता है।

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